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रा.मा.वि.सं. पुस्तकालय 

संस्थान के शिक्षण व अनुसंधान कार्यक्रमों को  समर्थन देने के लिये पुस्तकालय 1984 में स्थापित  की गई। यह पुस्तकालय प्रशासन ब्लॉक  में प्रथम तल पर स्थित है जहाँ 25000 ग्रन्थ रखने के लिए जगह है और 100 पाठकों  को एकामडेट करने  का पठन हाल  भी है। 

पुस्तकालय के उद्देश्य

  1. मानसिक मंदन  तथा संबंधित क्षेत्र में सुदृढ  संग्रहण का निर्माण करना।

  2. मानसिक मंदन   से ग्रस्त व्यक्तियों की देखभाल, प्रशिक्षण  तथा पुनर्वास  में रिपोर्ट  किये गये साहित्य  के नवीनतम विकास व तकनीकों का इकठ्ठा  कर, बदल कर अपनाकर सरकारी तथा गैर सरकारी सेक्टरों  में  कार्यरत्  व्यावसायिकों  को पिरोयी गई सूचना का  प्रचार द्वारा अद्यतन रहना।

  3. मानसिक मंदन   व्यक्तियों के अभिभावकों  को, स्वत: समूहों  तथा इस क्षेत्र में कार्यरत  स्वैच्छिक  संगठनों को कल्याणकारी, न्यास संबंधी तथा वित्तीय पहलूओं संबंधी  सरकारी नीति संबंधी  सूचना प्रदान करना।

  4. मानसिक मंदन के  पहचान, कारण, रोकथाम , प्रशिक्षण तथा पुन र्वास  संबंधि पहलूओं  पर जागरूकता सामग्री जैसे शैक्षणिक फोल्डर, पैम्पलेट, पोस्टर, समाचार पत्र, वीडियों  फिल्म, मैनुअल या अन्य कोई ऐसी  ही पुस्तिकाओं  के द्वारा आम जनता  में जागरूकता लाना तथा मानसिक मंद  बच्चों  के अभिभावकों  को शिक्षित  करना। 

पुस्तकालय  का कार्यकाल: 

सोमवार  से शुक्रवार : प्रात: 9.00 से रात 9.00 बजे तक 

शनिवार : प्रात: 9.00 से रात 5.30 बजे तक 

भोजन समय : दोपहर 1.00 बजे से 1.30 बजे तक

उपयोगकर्ता:

1.     राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान का पुस्तकालय विशेष पुस्तकालय है जो विभिन्न प्रकार  के उपयोगकर्ताओं  के लिए स्थापित   की गई है। संस्थान के विभिन्न  पाठ्यक्रम के लगभग 140 विद्यार्थियों, लगभग 160 संकाय सदस्यों  व अनुसंधान कर्मचारियों द्वारा पुस्तकालय का व्यापक रूप से प्रयोग किया जा  रहा है। इसके अलावा, पूर्व अनुमति द्वारा पुस्तकालय का प्रयोग स्वैच्छिक  संगठनों  के व्यावसायिकों, विभिन्न विश्वविद्यालयों व कालेजो के अनुसंधानकर्ताओं, अभिभावकों  एवं सामान्य जनता भी कर सकता है।

2. प्रत्यक्ष प्रयोगकर्ता: लगभग 300 प्रयोगकर्ता हैं जिनमें  रा.मा.वि.सं. के 50 संकाय सदस्य एवं 250 विद्यार्थी, राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान, दक्षिण केन्द्र  अतिथि  संकाय एवं अन्य  संस्थानों  व विश्वविद्यालयों के अनुसंधानकर्ता हैं।

3. अप्रत्यक्ष प्रयोगकर्ता :  7000 हैं जिनमें देश के सरकारी/गैर सरकारी संगठनों  के व्यासायिक हैं।

4. प्रतिदिन औसतन 75 सदस्य पुस्तकालय का लाभ उठाते हैं।

पुस्तकें एंव अन्य सामग्री:

रा.मा.वि.सं. पुस्तकालय में अनेक प्रलेखन हैं जैसे पुस्तकें, पत्रिकाएँ, लघुशोध रिपोर्ट, आफॅ‍ प्रिट्स, वीडियों फिल्में एंव सी.डी. आदि1 इसमें मानसिक  मंद व सबसे संबंधित  विशेष एवं प्रतिनिधत्व संकलन हैं।

सामग्री केवल इस  क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। अंतर्विषयी अनुसंधान क्रिाकलापों  को समर्थन देने  के लिए इसमें मनोविज्ञान, विशेष शिक्षा, बाल विकास, चिकित्सा (बाल चिकित्सा एवं मनोचिकित्सा), सामाजिक कार्य, मानसिक मंद व्यक्ति के परिवार के लिए परामर्श आदि विषयों  पर महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं।

i)     संदर्भ ग्रंथ: 
रा.मा.वि.सं. पुस्तकालय में संदर्भ ग्रंथो का एक अलग अनुभाग  है, जिसमें विषयक शब्दकोश, एनसाइक्लो‍पी‍डिया, सामान्य भाषाएँ, शब्दकोश, वर्षीय पुस्तकें आदि हैं। ये  संदर्भ ग्रन्थ केवल पुस्तकालय में ही  संदर्भ  के लिये दिया जाता है।

ii )     पत्रिकाएँ: 
पुस्तकालय  अभी 123 अंग्रेजी, हिन्दी तथा तेलगु भाषाओं  में भारतीय तथा भारतीय  तथा विदेशी  पत्रिकाओं का ग्राहक है  और पुरानी पत्रिकाओं  के बहुत  सारा संग्रह भी  है।

iii)      पाठ्य पुस्तकें:
संस्थान द्वारा चलाये जाने वाले विभिन्न पाठ्यक्रमों  के लिए निर्धारित पाठ्य पुस्तकों  को एक अलग अनुभाग भी हैं।

iv)    लघु  शोध – ग्रंथ :

संस्थान को प्रस्तुत किये  गये लघु शोध ग्रंथों का भी व्यापत संग्रह पुस्तकालय  मे रखा गया है। इसके अतिरिक्त मानसिक मंदन तथा संबंधी क्षेत्र  में विभिन्न विश्वविद्यालयों को प्रस्तुत किये  गये लघु शोध ग्रन्थों की फैसिमैल प्रतियाँ प्राप्त की जाती है।

v)         लेखागार: 
इस अनुभग में अपुस्तकीय सामग्री जैसे प्रतिवेदन, पैम्पलेट, सिलेबस, समाचार पत्र तथा माईक्रोफिल्म हैं जो संस्थान के शैक्षणिक  तथा अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए आवश्यक होते हैं। मानसिक मंदन तथा शिक्षा, श्रवण दोष तथा वाणी पहलू, शारीरिक विकलांगता तथा प्रमस्तिष्क अंगघात तथा मिरगी जैसे विषयों पर न्यूज क्लिपिंग की सूची बनाकर रखी जाती है। 

30.1.2010 तक की संग्रहण


पुस्तकें

9595

अवैधिक पत्रिकाएँ

123

समचार पत्र (राष्ट्रीय व स्थानीय)

11

पुनर्मुद्रण

1025

आडियोविजुवल सामग्री

322

बाउन्ड किये जर्नल

1926

ग्रे साहित्य (लगभग)*

15220

*इसमें वार्षिक रिपोर्ट, बिबिलियोग्राफी, विषय के फोल्डर, सावनीयर, संस्थान की विवरणिकाएँ तथा विश्वविद्यालयों की विवरणीकाएँ  आदि हैं।

पुस्तको की व्यवस्था

युनिवर्सल डेसिमल क्लैसिफिकेशन के अनुरूप नई पुस्तकों का वर्गीकरण किया जाताह ै।

  1. लेखक कैटलाग

  2. शीर्ष कैटलाग

  3. विषय कैटलाग

  4. इसकके अतिरिक्त जर्नलों के पत्रिकाओं के पुराना संग्रह, पुन मुद्रण, अपुस्तकी सामग्री तथा हिन्दी पुस्तकों  का अलग कैटलाग

 

सूचना प्रलेखन सेवाएँ

  1. संदर्भ सेवा: विभिन्न व्यावसायिक, विद्यार्थी, अभिभावक तथा जनता से सामान्य तथा बहुविषक प्रश्नों की आवश्यकता सूचना दी जाती है। 
  2. वर्तमान जागरूकता सेवा: देश के विभिन्न प्रान्तों में स्थित व्यावसायिकों  को मानसिक मंदन तथा संबंधित क्षेत्र के नवीनतम विकास व तकनीकी के बारे में अद्यतन कराने  के लिये जनवरी, 1986 में मेन्टार्ड नामक द्विमासीय पत्रिका  आरंभ  की गई। इस पत्रिका में पुस्तकालय में प्राप्त जर्नलों में प्रकाशित लेखों के ऐब्सट्रैक्टें, रूचिपूर्ण समाचार, आगामी सम्मेलन, विस्थापन तथा पुस्तकालय में जोड़ी गई नई पुस्तकों संबंधी सूचना दी जाती है। इस सेवा को प्राप्त करने के लिए  रूपये 150/- का वार्षिक  अंशदान शुल्क है और वर्तमान सूची में 300 ग्राहक हैं। 

  3. फोटोकापी सेवा: रा.मा.वि.सं. पुस्तकालय का यह मानना है कि, नियमित प्रलेखन सेवा का समर्थन मजबूती बैंक आप सेवाओं से हो। जर्नल लेख तथा पुस्तकों के अध्यायों  की फोटोकापी (50 पृष्ट से ज्यादा न हो)  को मेन्टार्ड बुलेटिन में सम्मिलित किया जाता है तथा विशेष रूप से निवदन करने पर नाम मात्र शुल्क लेकर दिया जाता है। 

  4. समाचार पत्र क्लिपिंग सेवा: ये सेवा 1 जुलाई, 1990 को इस उद्देश्य से आरंभ की गई है कि विकलांग व्यक्तियों  के कल्याण के लिए सरकारी नीतियाँ /  योजनाओं सहित देश में विकलांगता के क्षेत्र में वर्तमान स्थिति को बताने, अभिभावक/जनता के न्याय  व वित्तीय पहलुओं पर अपनी राय तथा सरकारी संस्थान व स्वैच्छिक संगठनों  के द्वारा चलाये  जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम, विभिन्न संस्थान  के क्रियाकलाप  आदि इसमें शामिल किये जाते हैं। लगभग 12 राष्ट्रीय / स्थानीय समाचार पत्र नियमित रूप से  देखा जाता  है तथा विकलांगता संबंधी सूचना इस सेवा में जोडी जाती है। 

  5. साहित्य अनुसंधान सेवाएँ: मानसिक मंदन एवं तत्संबंधी क्षेत्र  में विशेष रूची वाले विषय पर आंतरिक /  बाह्य  उपयोगकर्ताओं के साहित्य शोध के निवेदन  को स्वीकार कर दिये गये विषय पर पठन सामग्री प्रदान की जाती है। मेडलर्स तथा एरिक डाटा बेस पर आनलाईन साहित्य शोध  भी  निवेदन करने पर किया जाता है। 

  6. विषय विबिलियोग्रीफी का संकलन:   मानसिक मंद व तत्संबंधी  क्षेत्र  में दिये गये  विषयों पर पहले ही संकलित की जाती है या माँग करने पर भी की जाती है। पुस्तकालय में उपलब्ध साहित्य से ही उद्धरण दिये गए है। 

  7. विष चयन  सेवाएँ : यह पाक्षिक सेवा है जिसमें रा.मा.वि.सं. पुस्तकालय में जो पत्रिकाएँ आती हैं, उन पत्रिकाओं में से कुछ महत्वपूर्ण विषयों  के पन्नों  की फोटोकापीयाँ होती हैं। इस सेवा का उद्देश्य  उपयोगकर्ताओं को पत्रिका साहित्य प्रदान करना है। निवेदन  करने पर पूरा लेख भी दिया जाता है।

  8. इन्टरनेट / ई-मेल सेवाएँ: 1 मार्च, 2005 से खास तौर पर विद्यार्थी  वर्ग के लिये बी.एस.एन.एल. इन्टरनेट ब्रांडबैंड कनेक्शन, इन्टरनेट सेवाएँ  दी गई है। इस उद्देश्य के लिए पुस्तकालय के इन्टरनेट सर्च कैबिन में 5 सिस्टम रखे गए हैं। जहाँ  व़िद्यार्थी  इन सेवाओं से लाभ उठा सकते हैं। 

  9. ध्यानाकषर्ण विषय: नई दिल्ली, नवी मुम्बई एवं कोलकता में स्थित क्षेत्रीय केन्द्रों   में यह साप्ताहिक सेवा फरवरी, 2004 से व्यावसायिकों के लाभ के लिए प्रदान की जाती है। इसमें रा.मा.वि.सं. पुस्तकालय के पिछले सप्ताह मे उपलब्ध व्यावसायिक पत्रिकाओं  के विषय  वस्तु पन्ने सम्मिलित हैं। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य  है विभिन्न व्यावसायिक  पत्रिकाओं में मानसिक मंद व तत्संबंधी  क्षेत्रों  से आए हुए वैज्ञानिक साहित्य, क्षेत्रीय केन्द्रों में  इस पत्रिकाओं के ग्राहक  नहीं हैं। उन्हें साहित्य प्रदान करना। आशा की जाती है कि क्षेत्रीय केन्द्रों  में कार्यरत  व्यावसायिकों  की जरूरतों को यह पूरा करेगा। 

  10. संस्थानिक सदस्याता : मार्च, 2005 में स्वैच्छिक संगठनों, विशेष रूप से एच.आर.डी. वे आर.एस.डी. क्रियाकलापों में सम्मिलित हैं उनकी सहायता को संस्थानिक  सदस्यता सुविधा प्रारंभ की गई है। इस सदस्यता योजना में मांगकर्ता स्वैच्छिक  संगठनों  को रूपये 10000/- प्रतिदेय जमा करना है और रूपये 500/- वार्षिक  सदस्यता शुल्क जमा करना है। एक समय में कम से कम छ: पुस्तकें ले सकते हैं और 6 व्यक्ति पुस्तकालय का लाभ उठा सकते हैं। संस्थानिक सदस्य फोटोकापी सुविधा एवं प्रलेखन सेवाओं  से लाभ भी उठा सकते हैं।

 

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