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संस्थान का परिचय

    राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान  के तीन क्षेत्रीय केन्द्र नई दिल्ली, कोलकाता एवं मुम्बई में स्थित हैं, एन.आई.एम.एच. मॉडल स्पेशल एजुकेशन सेन्टर, नई दिल्ली, में स्थित है। यह संस्थान मानसिक मंद व्यक्तियों को समर्थ बनाने में विशेष प्रयास कर रहा है।  मानसिक मंदन से ग्रस्त प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की गुणता देश के अन्य नागरिकों के जीवन की गुणता के समान है; जिसमें वे अधिकतम संभाव्य सीमा तक स्वतंत्र रूप से जीवन गुजारेंगे और सामुदायिक एकता बनाये रखेंगे और राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान अपने  निरंतर व्यवासायिक प्रयासों द्वारा मानसिक मंद व्यक्तियों के  शैक्षिक, चिकित्सीय, व्यावसायिक, रोजगार, अवकाश कालीन और सामाजिक क्रियाकलापों, खेल-कूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पहुँच हेतु और संपूर्ण प्रतिभागिता के लिए मानसिक मंद व्यक्तियों को  अधीकृत बनाता है।  संस्थान जिन उद्देश्यों के लिए कार्य कर रहा है, वे इस प्रकार हैं।

    उद्दे्शय

    -   मानव  संसाधन विकास

    -   अनुसंधान एवं विकास

    -   देखरेख एवं पुनर्वास के नमूनों का विकास

    -   प्रलेखन तथा प्रचार

    -   ऐच्छिक संगठनों को परामर्शी सेवायें

    -   समुदाय आधारित पुनर्वास

    -  विस्तारण एवंआऊटरीचकार्यक्रम

    सर्वोत्तम  परिणाम प्राप्त करने के लिये संस्थान ने मास्टर स्तर पर प्रांरभिक अंतराक्षेपण, पुनर्वास मनोविज्ञान, विशेष शिक्षा एवं नि:शक्तजन पुनर्वास जैसे नवोन्मेषण रचनात्मक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम क्रमिक रूप से  चलाए जाते हैं, जैसे सर्टिफिकेट - डिप्लोमा - स्नातक - स्नातकोत्तर - मास्टर स्तरीय।  संप्रति संस्थान 5 सार्टिफिकेट कोर्स, 4 डिप्लोमा कोर्स (डी.एस.ई(एम.आर.) डी.वी.आर., डी.ई.सी.एस.ई., डी.सी.बी.आर.) का संचालन करता है और दो स्नातक कोर्स (बी.आर.टी.एवं बी.एड. स्पेशल एजु.(एम.आर.), 1 स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठयक्रम (पी.जी.डी.ई.आई) तथा 2 एम. फिल.(स्पेशल एजुकेशन एडं रिहैबिलिटेशन साईकॉलजी) कोर्स विभिन्न विश्वविद्यालयों  के सम्बद्ध से चलाता है।

    संस्थान की अनुसंधान नीति यह है कि अनुसंधान को लगातार अद्यतन करना व बढ़ावा देना जिसमे  मूलत: इन सभी को आवरित किया जाता है- (अ) मानसिक मंद व्यक्तियों के जीवनभर की आवश्यकताएँ (ब) थिरेप्युटिक हस्तक्षेप आवश्यकताएँ, परिवार समर्थन, संसाधन समर्थन, योग्यता बढाने की आवश्यकताएँ सहित मानसिक मंद व्यक्तियों के सम्पूर्ण विकास तथा (स)पब्लिक पॉलिसी एवं समाज  को समर्थ करना।  प्रचार व प्रलेखन संस्थान का एक महत्वपूर्ण क्रियाकलाप है जिसमें सम्मिलित हैं - (अ)  पुस्तकें, पत्रिकायें तथा प्रलेखन प्राप्त करना (ब) त्रैमासिक एन.आई.एम.एच. न्यूज लेटर तथा द्विमासिक मेंटार्ड बुलेटिन का प्रकाशन।

    संस्थान प्रमुख ऐच्छिक संगठनों,  अभिभावक समूहों के साझेदारी में मानसिक मंदन पर राष्ट्र स्तरीय संगोष्ठियाँ, विशेष कर्मचारीयों का राष्ट्रीय बैठक, अभिभावक संगठनों का राष्ट्रीय बैठक तथा राष्ट्रीय स्तर कार्यशालाओं का आयोजन करता है।  मानसिक मंद व्यक्तियों  को समुदाय में पुनर्वासित करने के लिये सेवाओं को जड़ स्तर पर ही  प्रदान करना चाहिए।

इन सेवाओं में सम्मिलित हैं- पहचानना, स्क्रीनिंग, निर्धारण करना, सेवायें प्रदान करना, स्थानीय  रिसोर्स व्यक्तियों को प्रशिक्षण देना तथा जिन्हें जरूरत हैं उन्हें प्रशिक्षण सामग्री की आपूर्ती करना।

मानसिक मंद व्यक्तियों के जीवन में समानता और सम्मान लाने के लिए संस्थान अपने कार्य के हर एक पहलू की गुणता पर ध्यान देता हैं, जिसका प्रमाणीकरण आई.एस.ओ. 9001:2008 के द्वारा  पृष्ठांकित  किया गया है।

उपलब्धियाँ

सोसाईटी का पंजीकरण

22 फरवरी, 1984

केन्द्र कार्यालय की स्थापना

सितम्बर, 1984

सेवाओं का प्रारंभ

15 फरवरी, 1985

अनुसंधान परियोजना का प्रारंभ

अप्रैल,  1985

मेंटार्ड - संक्षिप्त बुलेटिन

जनवरी, 1986

डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन (एम.आर.)

फरवरी, 1986

स्थायी भवन के लिये स्थानान्तरण

जून, 1986

एन.आई.एम.एच. न्यूज लेटर(इससे पहले करावलम्बन)

मार्च, 1987

डिग्री कोर्स इन मेंटल रिटार्डेशन

जुलाई, 1987

प्रारंभिक अंतराक्षेपण सेवायें

जनवरी, 1989

परिवार कुटीर सेवायें

जनवरी, 1991

प्रौढ स्वजीवनयापन विभाग(इससे पहले व्यावसायिक प्रशिक्षण विभाग)

जनवरी, 1991

बी.डी. मेनन स्वर्ण पदक पुरस्कार- डी.एस.ई.(एम.आर.) पाठयक्रम में अधिकतम अंक प्राप्तकर्ता के लिये

फरवरी, 1992

बहु- विकलांग इकाई

दिसम्बर, 1983

जननिक परामर्श इकाई

दिसम्बर, 1983

डिप्लोमा  इन वोकेशनल रिहैबिलिटेशन (मेंटल रिटार्डेशन)

नवम्बर, 1995

सुश्री ए.टी.थ्रेसियाकुट्टी को अक्षम व्यक्तियों के प्लेसमेंट अफसर के रूप में अत्युत्तम निष्पादन के लिए वर्ष 1995 का राष्ट्रीय पुरस्कार

दिसम्बर 1995

अश्विनि सप्रा पुरस्कार- बैचलर आफ मेंटल रिटार्डेशन में  उच्चतम रैंक प्राप्त करने पर दी जाने वाली पुरस्कार

फरवरी 1996

श्री जी.रविशंकर को वर्ष 1997 के लिए अपने सर्वोच्छ निष्पादन के लिए अत्यंत सफल अक्षम कर्मचारी के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान

दिसम्बर, 1997

क्षेत्रीय केन्द्र में सेवाएँ

दिसम्बर 1999

संश्लिष्ट क्षेत्रीय केन्द्र, भोपाल

अगस्त 2000

बी.एड. विशेष शिक्षा (एम.आर.)

अगस्त 2000

उत्तर पूर्वी क्षेत्र में आउटरीच सेवाएँ

नवम्बर 2000

जिला विकलांग पुनर्वास केन्द्र

दिसम्बर 2000

स्पाइनल इंजुरीज के लिए क्षेत्रीय पुनर्वास केन्द्र, जबलपुर

दिसम्बर 2000

बहु विकलांग व्यक्तियों के लिए सेन्सरी स्टिमुलेशन कक्ष

अप्रैल, 2001

मानसिक मंदन के साथ साथ आत्मविमोह से ग्रस्त बच्चों के लिए संसाधन कक्ष

अप्रैल, 2001

धीमी अधिगम वाले बच्चों के लिए संसाधन कक्ष

अप्रैल, 2001

पी.जी.डिप्लोमा इन एर्ली इन्टरवेन्शन

जुलाई, 2001

दूरस्थ पद्धति द्वारा बी.एड. विशेष शिक्षा के लिए स्टडी सेन्टर

जुलाई, 2001

विजुवल एक्युइटी टेस्टिंग के लिए संसाधन कक्ष

दिसम्बर 2001

जल चिकित्सा सेवाएँ

जनवरी, 2002

विस्थापन कक्ष

जनवरी, 2002

डिप्लोमा इन एर्ली चाइल्ड हुड स्पेशल एजुकेशन

मई, 2002

वर्क स्टेशन फार वोकेशनल ट्रेनिंग

जून, 2002

सर्टीफिकेट कोर्स इन स्पीच थिरेपी, फिजियोथिरेपी, साइकोलोजिकल एसेसमेंट एण्ड ट्रेन्सिशन फ्राम स्कूल टु वर्क, एर्ली इन्टरवेशन

अगस्त, 2002

मनोरंजनम सर्वीस युनिट फआर पर्सन्स् वित प्रोफाउन्ड मेंटल रिटार्डेशन

फरवरी, 2003

मानसिक मंद व्यक्तियों के लिए चलन सेवाएँ

फरवरी, 2003

बैचिलर्स इन रिहैबिलिटेशन थिरेपी (बी.आर.टी.) चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम, नई दिल्ली

सितम्बर, 2003

डिप्लोमा इन एर्ली चैइल्डहुड स्पेशल एजुकेशन, आर.सी., मुम्बई

अक्तूबर, 2003

एम.फिल. रिहैबिलिटेशन साइकोलोजी

नवम्बर, 2003

एम.एड.विशेष शिक्षा (एम.आर.)

नवम्बर, 2003

स्टडी फेलोशिप

मार्च 2004

मास्टर्स इन डिसबिलिटी रिहैबिलिटेशन एड्मिनिस्ट्रेशन (एम.डी.आर.ए.)

जुलाई, 2004

डिप्लोमा इन वोकेशनल रिहैबिलिटेशन, आर.सी.कोलकता

अगस्त, 2004

बी.एड.स्पेशल एजुकेशन (एम.आर.) आर.सी.कोलकता

अगस्त, 2004

डिपार्टमेंट आफ कम्युनिटि रिहैबिलिटेशन एण्ड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट

अक्तूबर, 2004

डा.विजयलक्ष्मीमैरेड्डी को वर्ष 2004 में नोडल अफसर फार बेस्ट डिस्ट्रिक्ट रिहैबिलिटेशन सेन्टर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत

दिसम्बर, 2004

आई.एस.ओ. 9001-2000 सर्टीफिकेशन

अप्रेल, 2005

आर.एल.सेठ स्वर्ण पदक - एम.फिल.रिहैबिलिटेशन साइकोलोजी में अधिकतम अंक प्राप्त विद्यार्थी के लिए

जून, 2005

तुला अनंत स्वर्ण पदक - पी.जी.डिप्लोमा इन एर्ली इन्टरवेन्शन में अधिकतोम अंक प्राप्त विद्यार्थी को

जून, 2005

डिजिटाइजेशन - एन.आई.एम.एच. के प्रकाशनों का

जनवर, 2006

आई.सी.टी. लैब

मई, 2006

विकलांग व्यक्तियों की प्रारंभिक पहचान तथा रेफरल सेवाओं पर उत्तर प्रदेश व बिहार के आंगनवाडी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर परियोजना

जून, 2006

डिप्लोमा इन सी.बी.आर.

अगस्त, 2006

एम.फिल. विशेष शिक्षा

सितम्बर, 2006

असम राज्य में विकलांगता की प्रारंभिक पहचान तथा रोकथाम पर पायलेट परियोजना

सितम्बर, 2006

आँ.प्र. उडीसा एवं प.बंगाल में माडर्न एर्ली इन्टरवेन्शन सेन्टर

अक्तूबर, 2006

आँध्रप्रदेश के निजमबाद, आदिलाबाद, श्रीकाकुलम, नल्लूर एवं गुण्टुर जिला, कर्नाटक राज्य के हवेरी, गडग जिला में एर्ली इन्टरवेन्शन सेंटर का एक्टेशन

मार्च, 2007

डी.ई.सी.एस.ई. केन्द्र उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व उडीसा में केन्द्र चलाने के लिए गैर सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता

जुलाई, 2008

श्री टी.सी.शिवकुमार को बेस्ट एप्लाईड रीसर्च व टेक्नालाजिकल इनोवेशन एम्ड एट इम्प्रूविंग द लाईफ आफ पी.डबल्यु.डी. से सम्मानित

दिसम्बर, 2008

एन.आई.एम.एच. का रजत जयंती समारोह

फरवरी, 2009

एम.एस.सी. (एर्ली इन्टरवे्न्शन)

अप्रैल, 2009

आई.एस.ओ. 9001-2008 प्रमाणीकरण

 

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