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शैक्षणिक कार्यक्रम

 

विषय व विवरण

डी.वी.आर.(एम.आर.)

यह कोर्स   मानसिक मंद व्यक्तियों  को उचित उपयुक्त व्यावसायिक प्रशिक्षण  एवं नियोक्ता मार्गदर्शन सेवायें  प्रदान करने  के लिये निम्नलिखित क्षमताओं के लिये तैयार किया गया है।

  • मानसिक मंद व्यक्ति की  व्यावसायिक प्रशिक्षण देने एवं  रोजगार पर रखने की तत्परता को पहचानना व निर्धारित करना

  • मानसिक मंद व्यक्ति में समुचित कार्य व्यवहार का विकास करना

  • समस्‍यात्मक व्यवहारों  का प्रंबधन

  • कार्य कुशलता का विकास करना तथा उनका निर्धारण करना

  • कार्य विश्लेषण तथा कार्य सरलीकरण से परिचित होना

  • उचित वर्क स्टेशन स्थापित  करना

  • मानसिक मंद व्यक्तियों, अनुरक्षकों एवं  समाज को  परामर्श देना

  • मानसिक मंद व्यक्तियों  के लिये व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं रोजगार सुविधायें स्थापित करना एवं मदद करना

 

प्रारंभिक बाल्यावस्था विशेष शिक्षा में डिप्लोमा (मानसिक मंदन)

प्रारंभिक बाल्यवस्था विशेष शिक्षा (ईसीएसईसी) 6 वर्ष  से कम उम्र के बच्चों पर ध्यान देता है और लक्ष्य वर्ग की योग्यता के आधार पर प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये विविध तरीकों और अभिगमों को उपयोग करता है। यह गृह  आधिरित   प्रशिक्षण, नियमित प्री-स्कूल, आंगनवाडी या बाल वाडियों में हो सकता है। यह मानव संसाधन के प्रशिक्षण की मांग करता है जो घर में आने वाला निरीक्षक या भ्रमणकारी संरक्षक होता है, या जो  नियमित विशेष प्री स्कूलों  अक्षमताओं  से ग्रस्त बच्चें को संभालने परिवारों के पास स्वयं जाता है। इस प्रारंभिक  बाल्यकाल के विशेष शिक्षक से यह भी अपेक्षा  की जाती है कि बहु-विषयक टीम का सदस्य हो , जो आम जनसंख्या के साथ-साथ अक्षम बच्चों  को शामिल  करते हुए पाठ्यक्रम की अभिकल्पना और प्रबंधन  करे। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस डिप्लोमा इन एर्ली चाइल्डहुड स्पेशल एजुकेशन की रूपरेखा बनायी गयी।

 

डिप्लोमा इन कम्युनिटि बेस्ड् रिहैबिलिटेशन

यह एक वर्षीय पाठ्यक्रम  समुदाय आधारित पुनर्वास (सीबीआर) कार्यक्रमों, मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण, शिक्षा, पुनर्वास, मानसिक अक्षमताओं से गस्त  व्यक्तियों के लिये रोजगार जैसे विषयों  पर ध्यान  केंद्रित करता है। यह अक्षमता के क्षेत्र में समुदाय आधारित पुनर्वास (सीबीआर)  क्षेत्र  की प्रबंधन तकनिकियों  से संबधित सभी क्षेत्रों की प्रोन्नति व अनुसंधान संचालित करेगा। यह सामाजिक पुनर्वास के लिये अक्षमताओं  से गस्त लोगों के लिए विभिन्न वर्गो  की आवश्यकताओं  की पूर्ती के लिए अंतरण-विषयक  प्रतिमानों और कौशलों  पर भी प्रकाश डालेगा। इस पाठ्यक्रम  को भारतीय पुनर्वास परिषद्  एवं सांविधिक निकाय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार से मान्यता प्राप्त है।


बी.एड. स्पेशल एजुकेशन (एम.आर.)

उपरोक्त कार्यो  के मद्देनजर नेशनल पॉलिसी ऑन एजुकेशन 1986 (शिक्षा की राष्ट्रीय नीति) यह दर्शा‍ती है कि (1) अल्प रूप से ग्रस्त नि:शक्तजन नियमित स्कूल में रहेंगें (2) गंभीर रूप से ग्रस्त नि:शक्त जन  विशेष स्कूल में रहेंगें। (3) स्कूल स्तर पर  शिक्षा का व्यावसायिकरण पर विचार किया जा सकता है। (4) विशेष आवश्यकता वाले बच्चों  को सम्मिलित करने के लिये  शिक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों  का पुन: अभिमुखीकरण किया जायेगा। (5) ऐच्छिक प्रयासों  को प्रोत्साहित करना चाहिए। ऐसी स्थिति में उपरोक्त कार्यक्रम ऐसे  कार्य कर सकें तथा अल्प मानसिक मंद बच्चों  को पढ़ाने  में उनमें सामर्थ्य हों।

आगे, अनुभव  यह बताता है कि, नियमित स्कूल वाले लोग, स्कूल में रिसोर्स रूम खोलने अनिच्छा   प्रकट करते हैं क्योंकि, उनके पास प्रशिक्षित  जन शक्ति नहीं हैं इससे नियमित शैक्षणिक संस्थानो में रिसोर्स शिक्षक रूप में, विशेष  शिक्षकों को रोजगार के अधिक अवसर पाने में मदद मिल सकती है। इस पाठ्यक्रम में, संगठन  व प्रशासन कौशेल सम्मिलित हैं जिससे वे विशेष स्कूल  के प्रभारी बन सकते हैं। इस पाठ्यक्रम में प्री-वोकेशनल क्षेत्र व समुदाय का सम्मिलित होना शामिल  है, जिससे स्कूल जाने की उम्र वाले मानसिक मंद बच्चों का  पूरा शैक्षणिक कार्यक्रम बनाने की योजना बनाई जा सकती है।


पोस्ट ग्रॅजुऐट डिप्लोमा इन अर्ली इंटरवेंशन

विकासात्मक विलंब वाले बच्चे विशेष सुधार दिखा सकते हैं यदि उनकी पहचान जल्दी  हो तथ उन्हें  विशेषज्ञों  की सेवायें छोटी उम्र में ही प्रदान  की जाए। ये पाठ्यक्रम स्वभाव से ही अनुशासन से परे हैं तथा दृष्टि  कोण में होलिस्टिक  है जिसमें सम्मिलित है बच्चे का विकास, शारीरिक चिकित्सा, व्यावसायिक चिकित्सा व्यावसायिक चिकित्सा, वाक् चिकित्सा तथा पारिवारिक अंतराक्षेपण। यह  पाठ्यक्रम  उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से संबद्ध  है। इस पाठ्यक्रम  के व्यावसायिकों  को निम्नलिखित  स्थानों पर कार्य करने  का अवसर  मिल सकता हैं।

    • अस्पतालों के बालचिक्तिसा ईकाईयाँ, बाल चिकित्सा  ईकाईयाँ, शिशु मार्गदर्शन क्लिनिक, जोखिम के लिए अनुवर्तन क्लिनिक, शिशु विकास केन्द्र,ग्रामीणप्राथमिकस्वास्थ्यकेन्द्रतथाजिलास्वास्थ्यकेन्द्र।
    • समाविष्ट पुनर्वास केन्द्र, दृष्टि क्षति , श्रवण क्षति, मानसिक मंदन, प्रमष्तिष्क अंगघात तथा लोको मोटर अक्षमता वाले व्यक्तियों  के लिये सेवा केन्द्र

    • प्रारंभिक अंतराक्षेपण केन्द्र, प्री-स्कूल तथ नर्सरी कार्यक्रम

 

एम.एड. विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन)

(एम.एड. विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन) शुरू  किया गया है। यदि हम देश की शैक्षणिक सेवाओं  के परिवेश  को देखें  तो ज्ञात होगा कि, हमारे पास विशेष स्कूल, नियमित स्कूलों  में विशेष कक्षाएँ, समेकित स्कूल, समुदाय आधारित  स्थापनाओं में विशेष शिक्षा  प्रोग्रामिंग बड़ी संख्या में हैं। एम.एड. विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन)उपरोक्त अनुसार विभिन्न संस्थापनाओं  में  मानसिक मंदन  से ग्रस्त बच्चों के साथ काम करने के लिये विशेष शिक्षकों के प्रशिक्षण  को लक्ष्य  में रखकर आरंभ किया गया है। एम.एड. विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन) में अर्हता प्राप्त व्यक्ति विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन)  में डिप्लोमा या ग्रेजुएशन स्तरों पर प्रशिक्षण  प्राप्त कर रहे विशेष शिक्षकों को पढ़ाने  के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में काम कर सकता है। इसके अलावा विशेष शिक्षण (मानसिक मंदन) के क्षेत्र में अनुसंधानकर्ताओं, लीडरों, क्षमता निमार्णकताओं, वृद्धिकर्ता और के टालिस्टों की तरह सेवा कर सकता हैं।



एम.फिल. विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन)

एम.फिल. विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन) का पाठ्यक्रम उस्मानिया विश्वविद्यालय से संबद्ध और भारतीय पुनर्वास परिषद्  द्वारा अनुमोदित है। विशेष शिक्षा गत दशक में मानव संसाधन की आवश्यकता वाला उभरता  और आगे बढ़ता  हुआ क्षेत्र है। अक्षमताओं  से ग्रस्त व्यक्तियों  के (समान अवसर अधिकारों की रक्षा और संपूर्ण प्रतिभागिता)  अधिनियम, 1995 शिक्षा प्रत्येंक अक्षम बच्चें का अधिकार माना है और इस तरह विशेष शिक्षकों  की भूमिका को और अधिक जोर दिया गया है। अत: सरकारी और गैर सरकारी संगठनों  द्वारा शिक्षण प्रशिक्षण  केन्द्रों की स्थापना आवश्यकता महसूस की गयी है।  मानसिक  मंद व्यक्तियों की शिक्षा की फिलासफी में बदलती  प्रवत्तियों  के आधार पर, मानसिक मंदन के क्षेत्र  में अनुसंधान ही प्रतिपादित है और ऐसे क्रियाकलापों को  को करने  के लिये योग्यता प्राप्त व्यक्तियों  की जरूरत  होती है। एम.फिल. विशेष शिक्षा (मानसिक मंदन) कार्यक्रम, मानसिक मंदन के क्षेत्र  में अनुसंधान और  मानव शक्ति को प्रशिक्षण देने हेतु उम्मीदवारों को तैयार करता है।



एम.फिल. पुनर्वास मनोविज्ञान

यह पाठ्यक्रम दो वर्षीय  कठोर पाठ्यक्रम  के रूप में चालाया जाता है, जिसमें अक्षमता पुनर्वास में बड़े पैमाने पर सिद्धांत पूर्वक  निवेश और गहन व्यवाहारिक   कौशल होते हैं। पुनर्वास मनोचिकित्सक के कार्य में तीन-तीन  भूमिकायें  यानी चिकित्सीय, परामर्शीय और सामजिक/समुदायिक  मनो‍वैज्ञानिक   की तरह निभानी  पड़ती हैं।

पाठ्यक्रम पूरा होने पर प्रशिक्षणार्थियों से निम्न कार्य करने की अपेक्षा है-

- अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों की स्क्रीनिंग और आरंभिक पहचान करना।
- अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों का व्यापक मनोवैज्ञानिक निर्धारण करना और निदान करना।
- अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के पुनर्वास में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों और तकनीकों को लागू करना।
- अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के सामाजिक और सामुदायिक समेकन की दिशा में कार्य करना।
- अक्षमता और पुनर्वास मनोविज्ञान के क्षेत्रों में अनुसंधान करना।
- पुनर्वास मनोविज्ञान में शिक्षण कार्यभार का निर्वाह करना है।



एम.एस.सी.(डिसबिलिटी) (एर्ली इन्टरवेंशन)

विकलांगता के क्षेत्र में रोकथाम, प्रारंभिक पहचान व प्रारंभिक मध्यस्थता अत्यंत महत्वपूर्ण है। विकासात्मक विलम्ब वाले बच्चों को सारे चिकित्सीय निवेशों के एक पूर्ण ट्रैन्स डिसिप्लिनरी अप्रोच की जरूरत है जिसमें चिकित्सीय, बाल विकास तथा परिवार मध्यस्थता सेवाओं जैसे निवेश आवरित हैं। विकासात्मक विलम्ब वाले बच्चों के जीवन के प्रारंभिक अवस्थाओं में सेवा प्रदान करने के लिए किसी व्यावसायिक का विशेष प्रशिक्षण निवेश होना जरूरी है। इसी के मद्देनजर एम.एस.सी. (डिसबिलिटी) (एर्ली इन्टरवेंशन) इस मास्टर स्तरीय कार्यक्रम की रूप रेखा बनाई गई और पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया।

इस दो वर्षीय पाठ्यक्रम को पूरा करने वाले व्यावसायिक अस्पतालों के बाल चिकित्सा इकाइयों में, बाल मार्गदर्शन क्लिनिकों में, जोखिम वाले बच्चों के क्लिनिकों में, बाल विकास केन्द्रों में, प्रारंभिक मध्यस्थता केन्द्रों में टीम लीडर के रूप में कार्य कर सकते हैं।

इन व्यावसायिकों को सेवा प्रदान करने, योजना बनाने, नीति बनाने तथा व्यापक पुनर्वास सेवाओं को क्रियान्वित करने जैसे कार्यों में शामिल किया जा सकता है। यह पाठ्यक्रम उस्मानिया विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है।

 

बी.एड.-विशेष शिक्षा (दूरस्थ पद्धति-भोज विश्वविद्यालय)

न्यूनतम पात्रता की शर्तें -
उम्मीदवार को

1. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यु.जी.सी.) से मान्यता प्राप्त किसी भी विश्वविद्यालय से बैचिलर डिग्री तथा

2. निम्न में से किसी एक शर्त को पूरा करना-

क) अक्षमता वाले बच्चे के माता-पिता

ख) अक्षम व्यक्ति हो

ग) आर.सी.आई.द्वारा मान्यता प्राप्त डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन

घ) आर.सी.आई. के ब्रिज पाठ्यक्रम पूरा कर लिया हो

च) एम.पी.बी.ओ.यु. द्वारा संचालित एफ.सी.-एस.ई.डी.ई. फाउन्डेशन पाठ्यक्रम पूरा कर लिया हो

छ) अपने ग्रेजुएशन के बाद किसी भी विकलांगता के क्षेत्र में विशेष पाठशाला में न्यूनतम दो वर्ष कार्य करने का अनुभव हो।

नोट- अभ्यर्थी की योग्यता के अनुसार आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित समर्थन कागजात संलग्न करना होगा।

  • उपरोक्त (क)/(ख) के अनुसार पात्र अभ्यर्थी पी.डबल्यु.डी.अधिनियम नियमावली के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी की गई विकलांगता प्रमाण पत्र की साक्ष्यांकित प्रति संलग्न करें (यदि माता - पिता हो तो विकलांग बच्चे का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें)
  • ग, घ तथा च के अनुसार पात्र अभ्यर्थी अंक पत्र तथा प्रमाण पत्र
  • वे अभ्यर्थी जो छ के अनुसार पात्र हैं, उन्हें चाहिए कि राज्य या केन्द्र सरकार के स्तर पर पी.डबल्यु.डी. अधिनियम के धारा 52 के अंतर्गत आर.सी.आई. के मान्यता प्राप्त संस्थान या संगठन के पदनामित प्राधिकारी द्वारी  जारी की गई अनुभव प्रमाण पत्र।

प्रवेश क्रियाविधि:

अपेक्षित शैक्षणिक  अहर्ताओं के आधार पर और संस्थानों और संबंध विश्वविद्यालयों की मौजूदा नियमावली के अनुरूप प्रवेश दिये जाते हैं। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/शारीरिक रूप से विकलांग / उम्मीदवारों  का केन्द्र सरकार नियमावली के अनुसार सीटों का आरक्षण दिया जाता है।

 

आगे की सूचना के लिए निम्नपते पर संपर्क करें-

सहायक प्रशासन अधिकारी (टी.पी.एस.)
राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान,
मनोविकास नगर,
सिकंदराबाद 500 009
दूरभाष - 040-27751741-45, फैक्स - 040-27750198
वेबसाइ
ट : www.nimhindia.gov.in
Email: academic@nimhindia.org, c_siddeshwar@yahoo.com

 

 

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